मृत्यु भोज के खिलाफ भास्कर के अभियान से लगातार लोग जुड़ते जा रहे हैं। इस अभियान से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में शहर के लोगों ने घोषणा करते हुए कहा कि उनकी मृत्यु होने पर परिवार के लोग मृत्युभोज जैसा आडंबर नहीं करें। वास्तव में अगर परिवार के लोग कुछ करना ही चाहते हैं तो मृत्यु भोज पर होने वाले खर्च से गरीबों की मदद करें। गरीब परिवार के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने कहा कि ताकि बच्चा शिक्षित होकर अपने पूरे परिवार को मुख्य धारा से जोड़ सकें।
गरीबों के इलाज में करें मदद, इससे मिलेगा पुण्य: हेमलता
उदयनगर वार्ड निवासी समाजसेवी हेमलता वैष्णव ने कहा मृत्यु भोज को लेकर दैनिक भास्कर जो अभियान चला रहा है वह सराहनीय है। मृत्यु भोज सभी समाजों में पूरी तरह से बंद होना चाहिए। अभी तक उनके समाज में भी यह कुप्रथा जारी है लेकिन अब वे समाज के लोगों को इस दिशा में जागरूक करेंगी। मैं तथा मेरे पति ओमप्रकाश वैष्णव ने अपनी दोनों बेटियों को अपनी इच्छा से अवगत करा दिया है कि हमारी मौत के बाद मृत्यु भोज नहीं कराया जाए। उस पैसों को गरीबों के इलाज पर खर्च करें।
मेरी इच्छा है कि मौत के बादमृत्यु भोज न हो: रीना लारिया
कांकेर जिला बाल सरंक्षण अधिकारी रीना लारिया ने कहा कि उनके ससुर की मौत एक वर्ष पहले जून माह में हुई थी तब हमने मृत्यु भोज कार्यक्रम पूरी तरह से सादगी से किया था जिसमें सिर्फ परिजन ही शामिल हुए थे। मृत्यु शाश्वत सत्य है इसलिए मेरी इच्छा है कि जब भी मेरी मौत हो तो मृत्यु भोज नहीं कराया जाए। परिवार उस पैसे को किसी गरीब बच्चे की पढ़ाई पर खर्च करे। अगर एक भी गरीब बच्चा पढ़ लिखकर अपने परिवार को मुख्यधारा से जोड़ पाया तो मुत्यु भोज से कई गुना अधिक पुण्य मिलेगा।
मुत्यु भोज जैसा कोईआडंबर नहीं हो: देवेश
शहर के भंडारीपारा वार्ड के यादव समाज के पूर्व नगर सचिव देवेश यादव ने कहा कि उनकी भी इच्छा है उनकी मौत के बाद मृत्यु भोज जैसा कोई कार्यक्रम नहीं हो। हमारे समाज में मृत्यु भोज पर पिछले 8 सालों से प्रतिबंध लगा हुआ है। लेकिन इसके बाद भी बहुत से लोग इस कुप्रथा को चला रहे हैं। समाज में एक के देखादेखी दूसरे लोग मुत्यु भोज कराते हैं जो पूरी तरह गलत है।
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