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Sunday, November 1, 2020

बाईपास , जलावर्धन योजना , मेडिकल कॉलेज, ट्राॅमा सेंटर और बीएड काॅलेज

छत्तीसगढ़ के 20वें स्थापना दिवस पर राज्य और जिले के विकास की बात करें तो कांकेर शहर को भी ढेरों सौगातें मिली लेकिन इन सब के पूरा होने शहरवासियों को केवल इंतजार ही कराया जा रहा है। शहर को इंतजार है बाइपास रोड, जलावर्धन योजना, मेडिकल काॅलेज, बीएड काॅलेज और ट्राॅमा सेंटर का। कांकेर शहर को नया आयाम देेने वाले इन निर्माण कार्यों के शुरू होने से लेकर पूर्ण होने तक की मियाद खत्म हुए लंबा समय बीत चुका है। मार्च तक इन निर्माण कार्यों के पूरा नहीं होने के पीछे पहले तो सियासी कारणों का हवाला दिया जाता रहा और मार्च के बाद से ठीकरा कोरोना पर फोड़ा जा रहा है।
पर्यटन, सड़क बनने से आगे कुछ नहीं हो पाया : पर्यटन को बढ़ावा देने शहर से लगे ऐतिहासिक गढिय़ा पहाड़ पर सड़क जरूर बन गई है लेकिन पहाड़ के सौदर्यीकरण के लिए 2.50 करोड़ रुपए स्वीकृत पड़े हैं। पैसे स्वीकृत होने के बावजूद इस दिशा में कोई कार्य नहीं हो पा रहा है। यही कारण है की यहां पर्यटन के अवसर नहीं बढ़ पा रहे हैं।

2018 में बाईपास पूरा होना था, दो साल और लगेंगे
2016 में बाईपास स्वीकृत हुआ। 99 करोड़ की लागत से माकड़ी से सिंगारभाट तक 10.5 किमी लंबा बाईपास अगस्त 2018 में पूरा होना था। दो साल बाद भी अगस्त 2020 तक काम पूरा नहीं हो पाया है। डामरीकरण तो काफी हद तक हो चुका है लेकिन गढ़पिछवाड़ी में पडऩे वाली दूधनदी तथा माकड़ी में पड़ने वाली चिनार नदी में पुल निर्माण अब तक शुरू नहीं हो पाया है। बाईपास के लिए अभी दो साल और इंतजार करना होगा।

12 सालों से अधर में है जलावर्धन योजना
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 24.56 करोड़ की लागत से जलावर्धन योजना बनाई थी जो 12 सालों से अधर में है। 2008 से चल रही इस योजना को मूर्तरूप देने राज्य शासन द्वारा जून 2012 मेें प्रशासकीय स्वीकृति देने के साथ बागोड़ महानदी में इंटेकवेल बनाने टेस्टिंग बोर कराया गया जो सफल था। फरवरी 2013 में विभाग ने टेंडर करते निर्माण पूरा करने दो वर्ष का समय दिया था।

जुलाई से मेडिकल काॅलेज में पढ़ाई शुरू होनी थी
कांकेर मेडिकल काॅलेज की मांग को 17 मार्च 2020 को हरी झंडी मिली। 325 करोड़ की लागत से तेलगरा में 100 बेड वाला मेडिकल काॅलेज बनना है। भवन निर्माण होने तक इस सत्र की पढ़ाई के साथ ही जुलाई अगस्त से जिला अस्पताल भवन में मेडिकल काॅलेज संचालित शुरू करने का दावा किया गया था जो पूरा नहीं हो पाया। स्वाभाविक रूप से ठीकरा कोरोना पर फोड़ा जा रहा है।

चार साल से खुद ही कोमा में है ट्राॅमा सेंटर
सड़क हादसे व अन्य मामलों में गंभीर घायलों को तत्काल इलाज मुहैया कराने जून 2016 में जिला अस्पताल में लेवल थ्री ट्राॅमा सेंटर बनाने केंद्र और राज्य शासन से हरी झंडी मिली। केंद्र की टीम जिला अस्पताल का दौरा भी कर चुकी है। 3.71 करोड़ रूपए की लागत से 2018 तक लेवल थ्री ट्राॅमा सेंटर बनकर तैयार हो जाना था। जिला अस्पताल में आजतक इसकी नींव तक नहीं खोदी जा सकी है।

बीएड काॅलेज का बोर्ड लगा लेकिन बजट नहीं
2016 में पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने बीएड काॅलेज की घोषणा की थी। मार्च 2017 में बजट में शामिल हुआ। नई सरकार बनने के बाद विश्वविद्यालय की टीम ने निरीक्षण कर इस सत्र से कक्षाएं शुरू करने स्वीकृति दी। 1 करोड़ की लागत से बीएड कालेज भवन बनना है। तब तक कक्षाएं बीटीआई भवन में संचालित होनी थी। बीटीआई भवन में बोर्ड भी लग गया लेकिन बजट के अभाव में काम आगे नहीं बढ़ पाया।

4 साल में नहीं लग पाया एक भी उद्योग
लखनपुरी के पास 2016 में 131 एकड़ औद्योगिक केंद्र की स्थापना की गई। योजना यहां उद्योग लगाने रियायती दरों पर जमीन तथा अन्य सुविधाएं देने की है। 4 सालों की यात्रा में यहां एक भी उद्योग नहीं लग पाया है। केवल दो राइसमिलों को जमीनें आवंंटित हो पाई है। उद्योग नहीं लगने से रोजगार के अवसर भी जिले में नहीं ही बढ़ पाए।



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