करीब 82 फीसदी भारतीय स्टूडेंट्स मानते हैं कि कोरोना महामारी के परिणामस्वरूप देश-दुनिया में नई नौकरियों और स्किल वाले लोगों की जरूरत बढ़ेगी। वहीं, 77 फीसदी स्टूडेंट्स का कहना है कि उनका करियर किस दिशा में आगे बढ़े महामारी ने इस पर सोचने पर मजबूर किया है। वे इस पर मंथन कर रहे हैं। यह तथ्य बुधवार को जारी एक सर्वे के निष्कर्ष में सामने आए हैं। डिजिटल लर्निंग कंपनी पीयर्सन ने इस सर्वे में भारत में 7,000 से अधिक स्टूडेंट्स की राय जानी। इसमें 88 फीसदी स्टूडेंट्स ने कहा कि आने वाले समय में ऑनलाइन लर्निंग प्राइमरी, सेकंडरी और हायर एजुकेशन का एक स्थायी हिस्सा बन जाएगा।
पीयर्सन के सीईओ ने जॉन फॉलन ने कहा, पढ़ाई के दौरान स्टूडेंट्स का नजरिया काफी लचीला होता है। भविष्य में क्या होगा यह कोई नहीं जानता है, लेकिन वे अपने करियर को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए नए रास्ते पर चलने को तैयार हैं। सर्वे के मुताबिक 71% स्टूडेंट्स मानते हैं कि एक सेहतमंद अर्थव्यवस्था और मुक्त समाज के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालयों का फिर से खुलना जरूरी है। वहीं, देश के 75% लोगों का मानना है कि कोरोनाकाल में कॉलेज और यूनिवर्सिटी शुरू करना स्टूडेंट्स की जान के लिए जोखिमभरा हो सकता है।
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