टाटा वर्कर्स यूनियन की कमेटी मीटिंग बुधवार को बिष्टुपुर के यूनियन कार्यालय में हुई, जाे काफी हंगामेदार रही। हालत ऐसी रही कि सवा घंटे में ही कमेटी मीटिंग खत्म हो गई। वहीं, विवादित आरोप लगने पर अध्यक्ष मीटिंग से बाहर निकल गए। मीटिंग में सबसे पहले कोरोना काल में मृत कर्मचारियों को श्रद्धांजलि दी गई। इस वित्तीय वर्ष के खर्च को पास कराने के लिए प्रस्ताव कोषाध्यक्ष प्रभात लाल ने रखा। खर्च का ब्योरा मिलते ही हंगामा शुरू हो गया। कमेटी मेंबर मो. रफीक व अशोक कुमार गुप्ता ने यूनियन पर नाजायज खर्च करने का आरोप लगाया।
वहीं, कोरोना काल के दौरान कार के इस्तेमाल और मेंटेनेंस पर खर्च दिखाने को गलत बताते हुए हंगामा करने लगे। इसके बाद कमेटी मेंबर संजीव तिवारी ने मजदूरों की समस्या का समाधान नहीं होने का आरोप लगाते हुए कहा मजदूरों के एलटीसी का समझौता, क्वार्टर एलाॅटमेंट समेत कई समस्याएं सुलझ नहीं रही हैं। यूनियन नेता कमेटी मेंबरों से घरों पर दरबारी कराते हैं। हंगामा को देखते हुए अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने संजीव तिवारी की माइक को बंद करा दिया, लेकिन वे जब बोलना नहीं छोड़े तो मीटिंग को खत्म करते हुए बाहर निकल गए। वहीं, इस मामले में यूनियन का कोई बड़ा नेता कुछ बोल नहीं रहा है।
काेराेना काल में कार के इस्तेमाल और मेंटेनेंस के खर्च का विरोध
बिना बहस बजट पास करने पर मेंबरो में दिखी नाराजगी
नाराजगी इस बात से भी थी कि यूनियन में 13 माह का एक साथ आय-व्यय का ब्याेरा प्रस्तुत किया गया। बिना विस्तार से चर्चा कराए उसे पास कर दिया गया, जबकि इस बार लगभग चार करोड़ से ज्यादा राशि के एकाउंट्स को पास कराया गया है।
चुनावी वर्ष में हंगामा करना विपक्षी मेंबरों का है काम
मीटिंग में चुनावी वर्ष में हंगामा करना विपक्षियों का काम है। बैठक के बाद जब खर्च का वाउचर देखने को कहा गया तो कोई नहीं आया। यूनियन के सौ वर्ष पूरे होने पर यूनियन ने 4.35 करोड़ रुपए मोमेंटो पर खर्च किए। यूनियन का कामकाज पूरी तरह पारदर्शी है।
अरविंद पांडेय, डिप्टी प्रेसीडेंट, टाटा वर्कर्स यूनियन
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