कोरोना का असर कम होने के साथ घाटशिला व आसपास से टूरिस्ट स्पाॅट पर्यटकों से गुलजार होने लगे हैं। पर्यटन के नक्शे पर जिले की अलग पहचान रही है। यहां पर्यटकों को लुभाने के लिए कई पर्यटन स्थल हैं। क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, बांग्ला के प्रसिद्ध साहित्यकार विभूतिभूषण बंदोपाध्याय का आवास गौरीकुंज, बुरूडीह डैम, धारागिरी, गालूडीह बराज, पांच पांडव समेत कई पर्यटन केंद्र हमेशा से लुभाते रहे हैं। प्रतिवर्ष कोलकाता व आस-पास से हजारों पर्यटक घाटशिला घूमने आते हैं। पर्यटकों के आने से बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
दिसंबर-जनवरी में घाटशिला के कमोवेश सभी पर्यटन स्थल पर्यटकों से गुलजार रहते हैं। पर्यटकों से होटल व्यवसाय से लेकर ऑटो तक का कारोबार बढ़ जाता है। घाटशिला के मनोरम दृश्य देख पर्यटक भी आनन्दित होते हैं। घाटशिला से फूलडूंगरी होकर बुरूडीह डैम जाने वाली सड़क जर्जर होने से पर्यटकों की परेशानी बढ़ रही है। मजबूरन पर्यटकों को काशिदा से होकर डैम जाना पड़ रहा है, वाहन का किराया बढ़ जाता है।
इधर, आधा दिसंबर बीता, फिर भी सुरक्षा के इंतजाम न के बराबर
मनोहर पर्यटन स्थल होने के बावजूद पर्यटकों को यहां हमेशा सुरक्षा एवं सुविधा को लेकर शिकायत रहती है। इस साल भी दिसंबर का आधा महीना बीत गया, लेकिन प्रशासन की ओर से पर्यटकों को लुभाने के लिए कोई पहल नहीं की गई है। पर्यटन केन्द्रों में सुरक्षा पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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