फसलों में ग्रोथ के समय किसानों को रासायनिक खाद की जरूरत होती है। मांग बढऩे के साथ ही बाजार में खाद की किल्लत बताकर कालाबाजारी की जा रही है। सबसे ज्यादा मांग यूरिया की है तथा यही बाजार में सबसे अधिक कीमतों में बिक रहा है।
रासयानिक खाद में यूरिया की सबसे ज्यादा मांग है जिसके चलते व्यापारियों ने इसकी कालाबाजारी शुरू कर दी है। लैंप्स में केवल लोन लेने वाले किसानों को ही यूरिया प्रदाय किया जाता है जहां तो यूरिया पर्याप्त मात्रा में हैं लेकिन यहां से सभी किसानों को यूरिया नहीं मिल पाता। दूसरे बैंकों से लोन लेने वाले या बिना लोन लिए खेती करने वाले किसानों को यूरिया निजी दुकानों से लेना पड़ता है। निजी दुकानों में यूरिया की कालाबाजारी हो रही है। इसके अलावा शहर के सिंगारभाठ स्थित सहकारी विपणन एवं प्रकिया समिति से भी किसानों को यूरिया तथा अन्य खाद प्रदाय की जाती है लेकिन यहां यूरिया का स्टाक पिछले 19 दिनों से समाप्त हो चुका है। संस्था के प्रबंधक ने एक हजार बोरी यूरिया की मांग की है लेकिन यूरिया नहीं पहुंच पाया है। यहां यूरिया का स्टाक समाप्त होने से किसानों को निजी दुकानों से ही यूरिया खरीदना पड़ रहा है। निजी दुकानों में 266 रुपए प्रति बोरी निर्धारित दर वाला यूरिया 450 से 500 रुपए तक बिक रहा है। ग्राम कोकपुर के किसान राजकिशोर शर्मा ने कहा लैंप्स से यूरिया लाए थे जो समाप्त हो गया। बाजार से यूरिया लेने गए तो 266 वाला यूरिया 450 रुपए में बेच रहे हैं। कोकपुर के गिरधारी जैन, चिंताराम जैन, सुधरू नेताम, योगेश्वर सलाम, लाल माटवाड़ा के किसान रूपसिंह सोनकर ने कहा प्राय: दुकानों में यूरिया समाप्त हो चुका है। जहां है तो 450 से 500 रुपए वसूल रहे हैं।
जमाखोरी करने वालों के खिलाफ की जाएगी कार्रवाई
कांकेर कृषि उपसंचालक नरेंद्र सिंह नागेश ने कहा सभी लैंप्स में यूरिया के साथ अन्य खाद पर्याप्त मात्रा में है। निजी दुकानों में भी निर्धारित दरों पर ही यूरिया बेचना है। कहीं अधिक कीमतों में बेचा जा रहा होगा तो कार्रवाई की जाएगी। पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है।
किसान बोले- तीन बार डालना पड़ता है यूरिया
किसानों को खेतों में यूरिया तीन बार डालना पड़ता है। धान की फसल में ग्रोथ का समय होने से यूरिया की सबसे अधिक जरूरत होती है। मांग बढ़ने व सहकारी संस्था में स्टाॅक समाप्त होने से कमजबूरी में निजी दुकानों से महंगा यूरिया खरीदना पड़ रहा है।
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