विद्या विकास समिति, झारखंड के तत्वावधान में रविवार काे नई शिक्षा नीति पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयाेजन किया गया। इसमें धनबाद जिले के सरस्वती विद्या मंदिरों के प्राचार्य और शिक्षक-शिक्षिकाओं के अलावा कई विद्वान शामिल हुए। गोष्ठी की शुरुआत मां शारदे की वंदना के साथ हुई। राजकमल के प्राचार्य सुमंत कुमार मिश्रा ने कहा कि नई शिक्षा नीति शिक्षा की मूल महत्ता को समझाने वाली होगी।
इससे बच्चे अपनी विशिष्ट पहचान बनाएंगे, उनके अंदर की प्रतिभा बाहर आएगी। मुख्य वक्ता बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के कुलपति अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नई शिक्षा नीति से भारत ज्ञान आधारित महाशक्ति बनेगा। बच्चों में स्वाभिमान विकसित होगा और शिक्षा जन-जन तक पहुंचेगी। इस नीति से बच्चों के लिए विद्यालय उनके घर का विस्तारीकरण होगा। बच्चे अपनी मातृभाषा में शिक्षा पाकर अपनी योग्यता बढ़ाएंगे। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब केवल अमीरों तक ही नहीं, बल्कि गरीबों तक शिक्षा का अलख जगाएगी।
नई शिक्षा नीति माटी से जुड़कर शिक्षा देने वाली नीति: नंदन
गोष्ठी की अध्यक्षता विद्या भारती के उत्तर पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय सचिव मुकेश नंदन ने की। कहा कि नई शिक्षा नीति माटी से जुड़कर शिक्षा देने वाली नीति है। इससे देश की पहचान बनेगी। मैकाले की शिक्षा नीति ने देश और देशवासियों को भ्रमित कर रखा है। इस नीति का राजनैतिक लाभ के लिए विरोध किया जा रहा है और यह सब चलता रहेगा। इसी क्रम हमें हर घर को विद्यालय बनाना है। इसी सोच को लेकर गोरखपुर में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की गई, ताकि हमारी शिक्षा बाल केंद्रित और क्रिया आधारित हो। गाेष्ठी में गुरु नानक कॉलेज की प्राचार्या डॉ संगीता नाथ, प्रो संजय सिन्हा, डॉ मीतू सिन्हा, राजकमल के उप प्राचार्य मनोज कुमार, संत कुमार श्रीवास्तव, अमर कांत झा, प्रभारी परिमल चंद्र झा, तापस कुमार घोष, सिनीडीह विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य मदन मोहन मिश्र आदि शामिल हुए।
नई शिक्षा नीति अपने आप में विराेधाभाषी है: प्राे नरेंद्र
बीएमकेयू के राजनीतिशास्त्र विभाग की ओर से रविवार काे नई शिक्षा नीति और भारत के कमजोर वर्ग: चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, सेंटर फाॅर पाॅलिटिकल स्टडीज के प्रो (डाॅ) नरेंद्र कुमार थे। उन्हाेंने कहा कि नई शिक्षा नीति एक ओर समावेशी और न्यायसम्य शिक्षा की बात करती है ताे दूसरी ओर शिक्षा को निजीकरण और बाजारीकरण के सुपुर्द करती है।
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