(मो. एनाम खान) कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा में पदस्थापित कृषि वैज्ञानिक अमरेशचंद्र पांडेय ने अपना जीवन सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को समर्पित कर दिया है। वे घूमघूम कर लोगों को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली ड्रिप एरिगेशन के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग में पीएचडी दिल्ली निवासी डॉ. पांडेय पिछले दो साल से गढ़वा में ड्रिप एरिगेशन में शोध व उल्लेखनीय कार्य के लिए 16 अंतर्राष्ट्रीय अवार्डाें के साथ-साथ तीन दर्जन नेशनल अवार्ड प्राप्त कर चुके हैं। नौ मार्च 2019 को राधाकृष्धन मेमोरियल इंटरनेशनल अवार्ड उन्हें न्यू दिल्ली में दिया गया था।
इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिकों के बायोडाटा संकलन से संबंधित पुस्तिका में उनका व्यक्ति परिचय लगातार 2010 से प्रकाशित किया जा रहा है। पांडेय का कहना है कि पलामू व गढ़वा जिला के सभी किसानों तक सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को पहुंचाना चाहते हैं। जिससे इस रैनशेडो एरिया के लोगाें को कम पानी में अधिक उपज प्राप्त हो सके। पांडेय ने कहा कि उनका घर भले ही दिल्ली जैसे महानगर में हैं। लेकिन वे गांव के लोगों को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से जोड़ना चाहते हैं।
इजराइल से किसानों को सीखने की जरूरत
अमरेशचंद्र पांडेय ने कहा कि उन्हें भारत के वैज्ञानिकों का प्रतिनिधि बनाकर इजराइल अध्ययन के लिए भेजा गया था। वहां उन्हें काफी दिनों तक खेती की पद्धति जानने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा भारत की तुलना में हजारों गुणा कम जमीन होने के आवजूद इजराइल ने पशुपालन व खेतों के विकास में जो मुकाम हासिल किया है, वह पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायी हैं। भारत के लोगों को भी उससे सीखने की जरूरत है। हमारे पास उससे ज्यादा जमीन और संसाधन उपलब्ध है। हमारा देश इजराइल से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
परंपरागत खेती छाेड़ें किसान : डॉ. अमरेशचंद्र
डॉ अमरेशचंद्र पांडेय ने कहा कि गढ़वा जिला के किसान ड्रिप एरिगेशन के माध्यम से थोड़े से पानी में भी खेती को सालोभर हराभरा रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को परंपरागत खेती छोड़कर आधुनिक तरीके से खेती करनी चाहिए। ड्रिप एरिगेशन से बूंद- बूंद कर पौधों की जड़ तक पानी पहुंचाया जाता है। वे इस पद्धति से गरमी के मौसम में भी धान की खेती कर चुके हैं। साथ ही फल, सब्जियों, अनाज आदि के उत्पादन में चौंकानेवाला लाभ प्राप्त हुआ है। गढ़वा में भी उनके प्रयासाें से कई स्थानों पर इसे शुरू किया गया है।
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