(मनोज व्यास) बेंगलुरु की तरह आरंग में वाटर एंड एजुकेशनल ट्रेनिंग व रिसर्च पार्क बनाया जाएगा। राज्य का यह पहला रिसर्च पार्क होगा, जहां इंजीनियर व प्लंबरों के साथ स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स को डिजिटल व प्रैक्टिकल माध्यम से वाटर हार्वेस्टिंग के बारे में जानकारी दी जाएगी। साढ़े चार एकड़ में यह प्रोजेक्ट तैयार होगा, जिसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग के सभी मॉडल बनाए जाएंगे। इसमें कॉमर्शियल ब्लॉक भी होगा, जिसके अंतर्गत शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और रेस्टोरेंट आदि बनाए जाएंगे।
इससे जो राशि मिलेगी, उससे रिसर्च पार्क का मेंटेनेंस किया जाएगा। राज्य शासन ने वाटर एजुकेशन एंड रिसर्च पार्क के लिए 17.93 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी तय होने के बाद तेजी से काम शुरू करने की प्लानिंग है, जिससे अगले शिक्षा सत्र के लिए तैयार किया जा सके। बता दें कि देश में बेंगलुरु में सबसे पहले ऐसा पार्क बनाया गया है, जो काफी चर्चित है।
ऑडिटोरियम में दिखाएंगे कैसे बचाएंगे पानी
वाटर रिसर्च पार्क को दो हिस्सों में बनाया जाएगा। पहले हिस्से में ऑडिटोरियम व रेन वाटर हार्वेस्टिंग के सभी मॉडल होंगे। ऑडिटोरियम में पहले वीडियो के जरिए बताया जाएगा कि किस तरह से पानी का संरक्षण किया जाए। भविष्य में कैसी दिक्कतें आ सकती हैं। इसके बाद अलग-अलग मॉडल होंगे, जिसमें मकान या बड़ी बिल्डिंग के डिजाइन के आधार पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बारे में बताया जाएगा। विभाग के एक्सपर्ट्स पूरी जानकारी देंगे।
नगरीय प्रशासन विभाग की टीम गई थी बेंगलुरु
रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए बेंगलुरु ने काफी महत्वपूर्ण काम किया है। वहां बच्चों-बड़ों सभी को रेन वाटर हार्वेस्टिंग के प्रति जागरूक करने के लिए रिसर्च पार्क बनाया गया है। नगरीय प्रशासन विभाग की टीम ने बेंगलुरु जाकर पार्क का निरीक्षण किया और उसके सभी पहलुओं को समझा। इसके बाद छत्तीसगढ़ के पहले वाटर रिसर्च पार्क का प्रस्ताव तैयार हुआ। राजधानी के करीब होने के कारण आरंग में इसका चयन किया गया है।
ये बनाए जाएंगे
- ऑडिटोरिएम, ओपन एयर थिएटर
- चारकोल, रेत व अन्य वाटर फिल्टर के मॉडल
- रेन वाटर डिमांस्ट्रेशन मॉडल
- स्वतंत्र मकान, फ्लैट या कैम्पस में आर्टिफिशियल रिचार्ज मॉडल
राज्य का पहला ऐसा रिसर्च पार्क
बेंगलुरु के मॉडल का अध्ययन करने के बाद यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। साढ़े चार एकड़ में यह तैयार होगा, जिसमें इंजीनियरों और प्लंबरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही, स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स को भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए जागरूक किया जा सकेगा।
-भागीरथी वर्मा, चीफ इंजीनियर, नगरीय प्रशासन विभाग
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