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Wednesday, August 12, 2020

चुनाव के दौरान कंट्रोल रूम और प्रोटोकाल संभालने वालों को मौका

कांग्रेस निगम, मंडल, आयोग और प्राधिकरणों की नई सूची में एक रिटायर्ड आईएएस, पीसीसी कंट्रोल रूम और प्रोटोकाल में तैनात सभी नेताओंं को मौका देने जा रही है। वरिष्ठ नेताओंं की रायशुमारी के बाद नामों की सूची लगभग तय हो गई है। जल्द ही नियुक्ति की सूची जारी की जाएगी।
प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में कांग्रेस समन्वय समिति की हाल ही में हुई बैठक के बाद लगभग सभी बड़े निगम-मंडल, आयोगों और प्राधिकरणों के लिए जिम्मेदारों के नाम तय कर लिए गए हैं। सूची में अध्यक्षों के साथ उपाध्यक्षाें और सदस्यों के नाम भी शामिल किए गए हैं। पहली सूची में कई निगमों में उपाध्यक्ष और सदस्यों के नाम घोषित नहीं किए गए थे, उनके नाम भी इसी सूची में जारी होने की संभावना है। पहली सूची में 26 निगम मंडल के नाम घोषित किए गए थे, वहीं इस बार 23 से अधिक निगम मंडल आयोगों में पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इस सूची में सत्ता संघर्ष में साथ निभाने वालों के साथ ही पीसीसी कंट्रोल रूम से विधानसभा, लोकसभा चुनाव की रिपोर्टिंग करने और चुनाव के दौरान नेताओंं की खातिरदारी में लगे लोगोंं को भी पद दिया जा रहा है।

नए संसदीय सचिवों को अब नहीं मिलेगा मंत्री की अनुपस्थिति में जवाब देने का अवसर
कांग्रेस ने 15 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया है, लेकिन संसदीय सचिव न तो मंत्री की अनुपस्थिति में विपक्ष या विधायकों के सवालों का जवाब दे पाएंगे, न ही विधायक के रूप में अपने सवाल पूछ पाएंगे। दरअसल, हाईकोर्ट के एक फैसले के कारण ऐसी परिस्थिति बन रही है। कांग्रेस जब विपक्ष में थी, तब संसदीय सचिवों की नियुक्ति के विरोध में अदालत जा चुकी है। भाजपा शासन में यह काफी अहम मुद्दा था, जिस पर कांग्रेस लगातार हमलावर रही थी। कांग्रेस के विरोध के बाद ही भाजपा शासन में संसदीय सचिव रहे नेताओं की कई सुविधाएं वापस ले ली गई थीं। हालांकि इस बार 69 सीटाें पर जीत के बाद 15 विधायकों को मंत्रियों के सहयोगी के रूप में संसदीय सचिव बनाया गया है। भाजपा शासन में संसदीय सचिव मंत्रियों की अनुपस्थिति या उनकी मौजूदगी में भी विपक्ष के सवालों का जवाब देते थे। इस बार संसदीय सचिवों को यह सुविधा नहीं है, इसलिए विपक्ष के सवालों का जवाब मंत्रियों को ही देना होगा। यदि मंत्री सदन में नहीं होंगे या वे किसी वजह से अनुपस्थित रहेंगे तो वे अपने विभागों से संबंधित सवालों का जवाब देने के लिए अन्य मंत्री को अधिकृत कर सकेंगे। इसकी सूचना भी उन्हें स्पीकर डॉ. चरणदास महंत को देनी होगी। इसके बाद संबंधित मंत्री जवाब देने के लिए खड़े होंगे। बता दें कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति से पहले भी कवासी लखमा के बदले में आवास, वन एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर बयान देते थे। इसे लेकर भाजपा मुद्दा बनाती रही है। मानसून सत्र में चार दिन की ही बैठक है, जबकि पहले दिन श्रद्धांजलि के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित की जा सकती है। यानी तीन दिन ही सवाल-जवाब व शासकीय कार्य हो पाएंगे। हालांकि भाजपा ने चार दिन के सत्र को लेकर भी आपत्ति की है। भाजपा ने सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की है, लेकिन कोरोना संक्रमण की बढ़ती स्थिति के कारण निर्णय नहीं लिया गया है।

दस से ज्यादा विधायकों के नाम
दूसरी सूची में दस विधायकों को मौका दिया जा रहा है। इसमें ठंडे बस्ते में जा चुके अरपा विकास प्राधिकरण में तीन तथा इंद्रावती विकास प्राधिकरण में तीन-तीन विधायक एडजेस्ट किए जा रहे हैं जबकि हाउसिंग बोर्ड में दो तथा मंडी बाेर्ड में दो विधायक को जिम्मेदारी दी जाएगी। बताया गया है कि सरकारी उपक्रमों की दूसरी सूची जारी होने के बाद संगठन का विस्तार किया जाएगा। इसमें ऐसे नेताओंं को महत्व दिया जाएगा जो सक्रिय हैं और लगातार पार्टी के लिए काम करते रहे हैं। पहले पीसीसी के शेष पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी इसके बाद जिला और ब्लॉक स्तर के पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

पार्टी विरोधी नेताओंं को पद नहीं
निगम-मंडल की सूची में ऐसे नेताओंं को पद नहीं दिया जा रहा है, जिनके खिलाफ विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगे हैं या फिर जिनकी पार्टी आलाकमान से शिकायत की गई थी। विधानसभा चुनाव के बाद ऐसे 300 से ज्यादा लोगों की शिकायतें की गई थीं। ऐसे सभी नामों को चिह्नांकित किया जा रहा है ताकि उनके नाम सूची में न आ जाएं।



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