ब्लॉक में लगभग 25 स्कूलों का जिला पंचायत से मिली राशि से किया जा रहा है। इसमें स्कूल भवनों को जिस समस्या को लेकर मरम्मत कराया जा रहा है उसका समाधान ही नहीं हो पाएगा। मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है।
इसी के तहत माध्यमिक शाला आसुलखार के भवन का भी मरम्मत कराया गया है। मरम्मत के बाद भी भवन के छत से पानी टपकने की समस्या खत्म नहीं हुई। ऐसे मरम्मत का क्या मतलब है यह ग्रामीणों द्वारा पूछा जा रहा है। प्राथमिक शाला आसुलखार में भी छत की मरम्मत के बाद स्कूल के अंदर पानी टपक रहा है। ऐसा ही हाल पेवारी स्कूल का भी है। ग्रामीणों ने कहा लाखों खर्च कर जिस उद्देश्य से स्कूल भवनों की मरम्मत कराया जा रहा है। वह लापरवाही व अनियमितता बरते जाने के चलते पूरा नहीं हो पा रहा है।
क्षेत्र के जनपद सदस्य थमश्री वैद्य ने कहा स्कूल भवन के मरम्मत के नाम पर भारी अनियमितता बरती जा रही है। इसकी जानकारी मांगने पर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दिया जाता। यहां काम करने वाले मजदूरों को गुणवत्तापूर्ण बनाने कहने पर ठेकेदार द्वारा जैसा बनाने कहा गया है वैसा बनाने की बात कहते हैं। इसकी जांचकर कार्रवाही होनी चाहिए। बसंत यादव ने स्कूल भवनों की मरम्मत ठीक नहीं होने से समस्या जस का तस है। वहीं लाखों की राशि खर्च होने के बाद भी कोई समस्या हल नहीं होगी।
ठीक से मरम्मत कार्य चालू है : बीईओ संजय ठाकुर ने कहा पूर्व में मरम्मत के लिए स्कूलों की सूची भेजी गई थी, जिससे मरम्मत के लिए जिला पंचायत से राशि मिली है। इससे स्कूल भवनों का मरम्मत करा रहे हैं। ठीक से मरम्मत कार्य चालू है, कही ठीक नहीं कर रहे हैं उन्हे अच्छा करने कहा जाएगा।
कुछ स्कूलों में नए सिरे से मरम्मत करने कहा है
आरईएस के सब इंजीनियर जितेंद्र गजबिये ने कहा मरम्मत के बाद कुछ स्कूलों का निरीक्षण किया गया, जिसमें कार्य अच्छा नहीं हुआ है। स्कूल में पानी टपक रहा है, जिसमें मरम्मत कार्य को नए सिरे से करने को कहा गया है। इससे पानी न टपके और नीचे प्लास्टर भी अच्छा करने कहा गया है।
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