कामधेनु गौसेवा संस्थान कर्रामाड़ में शासन से प्राप्त अनुदान राशि का गबन करने की मामले में दुर्गूकोंदल पुलिस ने संस्थान के संचालक पीयुष घोष को सोमवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसी मामले में कामधेनु गौसेवा संस्थान के अध्यक्ष मलिना मंडल, सचिव प्रवीण घोष को 17 सितंबर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। थाना प्रभारी अजय साहू ने बताया कामधेनु गौसेवा संस्थान कर्रामाड़ में पशुचारा, औषधि, टीकाकरण, शेड निर्माण, बोर खनन के लिए 64 लाख 67हजार अनुदान राशि जारी हुआ था। इसका संस्था द्वारा गबन कर लिया गया। मामले उजागर होने पर शासन से जांच समिति गठित की गई थी। जांच समिति ने पाया कि शासन से प्राप्त अनुदान राशि से पशुओं को सही चारा नहीं खिलाने, बीमार पशुओं का उपचार नहीं कराने से 46 पशुओं की भूख व बीमार से मौत होना पाया गया। शेड निर्माण के लिए शासन से प्राप्त राशि से नया शेड निर्माण नहीं किया गया। वहीं बोर खनन के लिए राशि आने के बाद भी बोर खनन नहीं कराना गया। इसी जांच के आधार पर गौसेवा आयोग के सचिव एनपी पासी के रिपोर्ट पर संस्था संचालक व अन्य पर धारा 420, 120बी के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पता तलाश की जा रही थी। 17 सितंबर को संचालक पीयूष घोष की पत्नी एवं संस्थान के अध्यक्ष मलिना मंडल और पुत्र सचिव मलिना मंडल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। 21 सितंबर को कामधेनु गौसेवा संस्थान के कोषाध्यक्ष एवं संचालक पीयूष घोष को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। गबन करने वालों की गिरफ्तारी पर ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की।
ग्रामीण हरिश्चंद्र धनेलिया, सुभाष सोम, राजाराम सोम, बलराम रावटे, ईश्वर बघेल, जगत धनेलिया, पुष्पलता रावटे, लता सोम ने कहाहम गौसेवा संस्थान प्रारंभ होने से खुश थे, लेकिन गौसेवा के नाम पर संस्थान के संचालक पीयूष घोष ने हमारे गांव के नाम पर नाममात्र की समिति बनाई। इसका पैसा आहरण के लिए अपनी पत्नी को अध्यक्ष और पुत्र को सचिव व परिजनों को सदस्य बनाकर शासन से प्राप्त राशि का गबन किया। यहां गौसेवा नहीं बल्कि गौसेवा के नाम पर गोरखधंधा धंधा चल रहा था, जिसका पर्दाफाश हो गया।
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