Breaking

Thursday, September 24, 2020

पांडेयडीह : जमीन में गड़बड़ी का आरोप लगाकर हंगामा

गिरिडीह में जमीन की माफियागिरी आम हो चुकी है। जिसमें शहरी क्षेत्र व आसपास के इलाके में भू-माफियों का वर्चस्व अधिक है। खासकर पांडेयडीह मौजा इस मामले में लंबे समय से सुर्खियों में रहा है। लेकिन तत्कालीन रघुवर सरकार की गैरमजरूआ जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक के बाद और वर्तमान में गिरिडीह जिले की कड़क प्रशासन के सामने भू-माफियों की दुकानदारी पर थोड़ी चोट पहुंची है। लेकिन गुरुवार को अंचल कार्यालय में धरना व प्रदर्शन के बीच एक बड़ा खेल सामने आया है, जिसमें जिले के सेकेंड लाईन का एक अफसर पूरे खेल में डायरेक्ट संलिप्त है।

क्योंकि जिस मुद्दे को लेकर ये प्रदर्शन था उस मुद्दे को लेकर उक्त अफसर पिछले तीन सप्ताह से न सिर्फ परेशान है, बल्कि मौखिक तौर पर गलत के पक्ष में आदेश करने का दबाव बनाता रहा। लेकिन जब संबंधित अधिकारी ने गलत के पक्ष में आदेश पारित करने से मना कर दिया तो फिर धरना व प्रदर्शन शुरू हो गया। अंचल कार्यालय के बाहर बगैर अनुमति 100 लोगों का जुटान हुआ और घंटों लोगों ने नारेबाजी की।

दादा झंडू मरीक को बंगाल कोल कंपनी से हासिल है जमीन : मरीक

गिरिडीह सदर अंचल के पांडेयडीह मौजा में स्थित 8.25 एकड़ जमीन की एलपीसी पर रोक लगाने की मांग को लेकर स्थानीय एक मरीक परिवार ने गुरुवार को अंचल कार्यालय में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पांडेयडीह के अलावा मरीक समाज के महिला व पुरूष शामिल थे। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कृष्णा मरीक व सीताराम मरीक ने कहा कि पाण्डेयडीह मौजा के खाता संख्या 6 के प्लॉट नंबर 391, 392 व 393 में कुल रकबा 8.58 एकड़ जमीन है।

जो उसके दादा झंडू मरीक ने रैयती बंदोबस्त 1935 को भूतपूर्व जमींदार बंगाल कोल कंपनी से हासिल किया था। जबकि इसी खाता नंबर 6 में माखनलाल जालान की भी 35 बीघा जमीन है, जिसका प्लॉट नंबर 381 व 382 है, जो जाली कागजात व केवाला हासिल किया गया, जिस पर पूर्व से ही अन्य लोगों का कब्जा है।

रजिस्टर्ड केवाला से हासिल की है जमीन : माखन लाल जालान

माखन लाल जालान के मुताबिक पाण्डेयडीह स्थित खाता 6 प्लॉट 391, 392, 393 की भूमि माखन लाल जालान की पुश्तैनी ज़मीन है, जो उनके परिवार को 1935 में रजिस्टर्ड डीड से हासिल है। भूलवश डीड में गलती से प्लाॅट 391, 392, 393 के स्थान पर 381, 382 दर्ज हो गया था। जिसका लाभ उठाकर कई लोगों ने विवाद शुरू कर दिया। इसी मामले में जाली कागज़ातों के आधार पर 2006 में श्यामसुंदर मनमोहन ने न्यायालय में मुकदमा 29/2006 भी दायर किया था, जिसे न्ययालय ने 2017 में खारिज़ करते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। इसी बीच प्लॉट नंबर की भूल का लाभ उठाते हुए भू-माफियों द्वारा जाली कागजात बना हेराफेरी कर बिक्री करने की कोशिश की गई। सूचना मिलते ही तत्कालीन डीसी उमाशंकर सिंह द्वारा मामले की जांच कराई गई।

सच्चाई को नहीं किया जा सकता खारिज : सी

इधर अंचलाधिकारी रवीन्द्र सिन्हा ने कहा कि सच्चाई को कोई खारिज नहीं कर सकता है। लंबे समय की जांच व पड़ताल के बाद इस पर आदेश पारित किया गया है। दफ्तर के बाहर हंगामा व प्रदर्शन से सच्चाई को खत्म नहीं किया जा सकता है। जहां तक माखन लाल जलान के पक्ष में आदेश पारित करने का सवाल है तो वह तमाम दस्तावेज, जांच व रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। पारित आदेश में भी स्पष्ट उल्लेख है कि असंतुष्ट पक्ष उपरी अदालत में जा सकता है।

लिहाजा असंतुष्ट पक्ष कानूनी रूप से उपरी अदालत में जाएं और अपना हक प्राप्त करें। अंचल कार्यालय ने गलत आदेश पारित किया है तो उपरी अदालत में खारिज होगा। लेकिन बगैर सूचना के कार्यालय के बाहर हंगामा, काम में बाधा पहुंचाना, असंसदीय भाषा का प्रयाेग करना अनुचित है, जिस पर कार्रवाई भी हो सकती है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Pandeydih: Uproar by alleging land disturbances


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3kM0OX7

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Pages