नगर पालिका की दुकानों में व्यवसाय कर रहे दुकानदार समय पर दुकानों का किराया नहीं पटा रहे हैं। कई ऐसे दुकानदार भी हैं जिन्होंने 3 से 10 साल तक का अनुबंध एक साथ करा लिया है पर अनुबंध राशि का भुगतान ही अब तक नहीं कर पाए हैं। शहर के 247 दुकानदारों से पालिका को 68 लाख रुपए वसूलने हैं। जिसकी वसूली को लेकर पालिका द्वारा बकायादार दुकानदारों को नोटिस जारी कर जल्द किराया जमा करने को कहा गया है। सीएमओ का कहना है कि इस नोटिस की अनदेखी करने वाले कारोबारियों को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि यदि वे नोटिस के बाद भी बकाया राशि जमा नहीं करते हैं तो उनके नाम पर हुआ आवंटन निरस्त हो सकता है। निरस्ती के बाद खाली हुए दुकानों की फिर से नीलामी की जाएगी।
दुकानों का किराया समय पर नहीं आने के कारण अब पालिका दुकानदारों के लिए सख्त नियम लागू करने जा रही है। नोटिस जारी कर ना सिर्फ पुराना किराया वसूल करने की कार्रवाई चल रही है बल्कि अब नए नियम को भी लागू कर दिया गया है। नए नियम के तहत अब पालिका की हर दुकान का अनुबंध सिर्फ एक साल के लिए होगा। अनुबंध अवधी पूरी होने के बाद दुकानदारों को फिर से एक साल के लिए नया अनुबंध करना होगा। अनुबंध राशि हर साल जमा करना होगा। दुकान का किराया हर महीने के 7 तारीख तक जमा करना अनिवार्य होगा। दुकानों के रख-रखाव को अपनी ओर से करना होगा। यदि कोई व्यक्ति लगातार दो महीने तक किराया नहीं पटाता है तो उसका अनुबंध निरस्त कर दुकान नीलाम करने की कार्रवाई की जाएगी।
गुमटियों की जगह नया कॉम्पलेक्स बनाने की योजना
सीएमओ बसंत बुनकर ने बताया कि यदि बकाया किराया वसूली हो जाता है तो जिन स्थानों पर गुमटियां हैं वहां पालिका द्वार नए शॉपिंग कॉम्पलेक्स का निर्माण किया जाएगा। जैसे जय स्तंभ चौक के पास, स्टेडियम के पीछे व अन्य स्थानों पर। वर्तमान में पालिका द्वारा चिन्हित 17 गुमटियां शहर के विभिन्न स्थानों पर हैं। गुमटियों में कारोबार करने वाले लोगों को पक्की दुकानें देने की योजना बन चुकी है।
जिन्होंने किराए पर दी हैं उनके सामान होंगे जब्त
पालिका की दुकान को किराए पर देने वाले हितग्राहियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर ली है। जो लोग हितग्राहियों से किराए मेें दुकान लेकर उसमें कारोबार कर रहे हैं उनके सामान को राजसात होगा। क्योंकि पालिका द्वारा जिस हितग्राही के नाम पर दुकान आवंटित किया जाता है, उसमें शर्त यही रहती है कि हितग्राही स्वयं कारोबार करेगा। पर शहर में पालिका की दुकान को किराए पर देने का कारोबार चल पड़ा है। कई लोगों के पूरे परिवार के नाम दुकान है। ऐसे भी प्रकरण सामने आ रहे हैं जहां एक व्यक्ति के नाम पर कई दुकानें हैं और व्यक्ति स्वयं कारोबारी नहीं है।
शहर में आधी से अधिक दुकानें पालिका की
जशपुर शहर में जितने भी शॉपिंग कॉम्पलेक्स व बाजार हैं उसमें आधी से अधिक दुकानें नगर पालिका की हैं। पूरा बाजार ही पालिका की दुकानों पर टिका है। प्राइवेट कॉम्पलेक्स व दुकानें 30 प्रतिशत ही हैं। ऐसे में पालिका द्वारा दुकान किराया वसूली की कार्रवाई से पूरे शहर में व्यवसायियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। पालिका द्वारा शहर में स्वावलंबन योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय रोजगार योजना, स्ववित्त योजना व सार्वजनिक क्षेत्र में भागीदारी के तहत दुकानों का निर्माण किया गया है।
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