ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित कक्षा दो से पांच तक के स्कूली छात्रों को पढ़ाने के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग बाल शिक्षकों के प्रयोग की तैयारी कर रहा है। ये वैसे बाल शिक्षक होंगे, जिन्होंने मैट्रिक-इंटर पास कर लिया है तथा वे अपने टोले-मोहल्ले के बच्चों को पढ़ाने की इच्छा रखते हैं। शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कई दफे इसके लिए शिक्षा अधिकारियों से बात की है कि बच्चों की पढ़ाई का हल निकाला जाए। इसे देखते हुए यह कोशिश शुरू हुई है। गांव और कस्बों में मैट्रिक-इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्र-छात्रा को बाल शिक्षक का दर्जा दिया जाएगा।
वे ही ऐसे बच्चों को छोटे-छोटे समूह में कोबिड-19 के मानकों का पालन करते हुए पढ़ाएंगे। स्कूल के हेडमास्टरों को यह जिम्मेवारी दी जाएगी कि वे एक-दो बैच पुराने छात्रों से संपर्क कर बच्चों की मदद के लिए आग्रह करें। ऐसे छात्र-छात्रा अपने घरों के अगल-बगल के बच्चों को पढ़ाएंगे। बाल शिक्षक मुख्य रूप से कक्षा दो से पांच के सभी बच्चों को अंग्रेजी और हिंदी में वाक्य पढ़ने की जानकारी देंगे। दो अंकों की संख्या को घटाने की भी जानकारी देंगे। इसके लिए उन्हें सरकार की ओर से उन्हें पुरस्कृत करते हुए सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए हो रहा प्रयास
विभिन्न जिलों के शिक्षा अधिकारी और स्कूलों के हेडमास्टर अपने-अपने स्तर से बच्चों की पढ़ाई के लिए सचेष्ट हैं। सभी अपने ढंग से कोशिश कर रहे हैं। विभाग के स्तर पर भी कई चीजें चल रही हैं। जल्द इसका स्वरूप सामने आएगा।
शैलेश कुमार चौरसिया, एसपीडी, झारखंड शिक्षा परियोजना
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