राज्य के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में इसी साल अप्रैल से 13 एकलव्य आवासीय विद्यालयों को शुरू करना था। लेकिन इनमें से 12 अब भी अधूरे पड़े हैं। विभागीय मंत्री चंपई सोरेन ने इन्हें संचालित करने को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे, पर इन सबके पूरे होने में कितना वक्त लगेगा, कोई अधिकारी दावे से बताने को तैयार नहीं। निर्माण कार्य शुरू होने के छह साल बाद भी पश्चिम सिंहभूम के गुदरी में बन रहा स्कूल भवन महज 16 प्रतिशत ही बन पाया है। यही हाल जामताड़ा जिले के फतेहपुर और प. सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी में बने रहे स्कूलों का है।
फतेहपुर में 2016-17 में शुरू हुआ काम अब तक मात्र 40 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। इसी प्रकार कुमारडुंगी में वर्ष 2017-18 में शुरू हुआ निर्माण कार्य 45 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। केवल लिट्टीपाड़ा में ही निर्माण कार्य पूरा हुआ है, लेकिन वहां भी पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है। केंद्र सरकार के शत-प्रतिशत सहयोग से अभी राज्य में सात एकलव्य स्कूल संचालित हैं। इन आवासीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए पाठ्य पुस्तक, यूनिफार्म, भोजन, आवास, खेलकूद और स्वास्थ्य जांच सुविधाएं सबकुछ निःशुल्क उपलब्ध हैं। इन स्कूलों में कक्षा छह तक प्रति छात्र सालाना 28 हजार रुपए और कक्षा 12वीं तक के बच्चों पर 32 हजार रुपए प्रति छात्र खर्च किए जा रहे हैं। प्रत्येक कक्षा में 80 बच्चाें का नामांकन होता है।
काम पूरे नहीं होने के अलग-अलग कारण : कल्याण सचिव
कल्याण सचिव अमिताभ कौशल ने कहा कि ये सारे स्कूल कब तक पूरे होंगे, इसके बारे में अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। सबके अलग-अलग कारण हैं। कोरोना काल में काम बंद रहा था। कुछ जगहों पर काम शुरू हुआ है। हमलोग इन स्कूलों को शुरू करने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।
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