एनटीपीसी के खिलाफ एक सितंबर से ग्रामीणों के द्वारा मुआवजा एवं रोजगार को लेकर आंदोलन जारी हैं । इसके कारण कोयला ट्रांसपोर्टिंग एवं कोयला खनन कार्य पूर्ण रूप से बंद पड़ा है। तीन अक्टूबर को प्रखंड मुख्यालय में स्थानीय प्रशासन एवं धरना प्रतिनिधियों की बैठक हुई। जिसमें कोयले में लगी आग को देखते हुए कोयले की ट्रांसपोर्टिंग करने की अपील प्रशासन के द्वारा की गई थी। जिसे लेकर रविवार को चेपाखुर्द गांव खेल मैदान में विस्थापित एवं प्रभावितों की विशेष बैठक हुई। बैठक में आंदोलन कर रहे लोगों ने भाग लिया । जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष विशेश्वर नाथ चौबे एवं संचालन डाड़ी कला गांव निवासी रियासत हसन ने किया।सभी ने एक ही बात कही कि जब तक एनटीपीसी हम लोगों की मांगे पूरी नहीं करती है तब तक हम लोग आंदोलन जारी रखेंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि एनटीपीसी को आज अपने कोयले में आग लगने की बड़ी चिंता सता रही है लेकिन हम लोगों के पेट में लगी आग की चिंता एनटीपीसी को क्यों नहीं हो रही है। किसी भी हालत में हम लोग डंप किए हुए कोयले का ट्रांसपोर्टिंग नहीं होने देंगे। अगर आग लगी हुई है तो कंपनी कोयले को अलग-अलग जगह में विभाजित करके रख दे आग लगने से भी बचाव होगा।वहीं स्थानीय विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि एनटीपीसी इतने घमंड में है कि आज तक अधिकारी ग्रामीणों से वार्ता तक करने नहीं आए है ।राज्य सरकार के उच्च स्तरीय कमेटी के प्रस्ताव को भी मानने से इनकार कर दिया है ।केंद्र सरकार झारखंड राज्य को किसी तरह का लाभ नहीं देना चाहती है। इसी तर्ज पर एनटीपीसी अड़ियल रवैया में है और कौड़ी के भाव में हमारे राज्य के खनिज संपदा को लूटना चाहती है।
विधायक ने कहा कि पकरी बरवाडीह परियोजना अगर राज्य सरकार के अधीन होता तो अब तक सभी विस्थापित एवं प्रभावितों के मांग को पूरा किया जा चुका होता ।अगर एनटीपीसी सोचती है कि लंबे आंदोलन से ग्रामीण थक जाएंगे और आंदोलन स्वत: छोड़ देंगे तो वह गलत सोचते हैं। मैं प्रत्येक दिन आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाउगी और हर हाल में ग्रामीणों की मांग को पूरा करआऊंगी । इसके लिए अपना और हम सभी का समय को ध्यान में रखते हुए इन समस्याओं का समाधान एनटीपीसी जल्द करें। बैठक के दौरान प्रशासन ने कंपनी के द्वारा डंप किए गए कोयले में आग लगने की जानकारी ग्रामीणों को दी मौके पर हजारीबाग एसडीओ विद्याभूषण, बड़कागांव प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रवेश कुमार साव , अंचला अधिकारी वैभव कुमार सिंह, एसडीपीओ भूपेंद्र प्रसाद रावत, बड़कागाँव थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर ललित कुमार, डाड़ी कलाँ थाना प्रभारी महेंद्र बैठा, विस्थापित ग्रामीण क्षेत्र के बरकतउल्ला, हरदयाल राम, राम केवल राम दीलेश्वर महतो,रामदुलार साव, लक्षमन महतो, रीना देवी, चेतलाल महतो, देव प्रसाद महतो, बबलू कुमार, प्रतिमा देवी, कृष्ण कुमार, पृथ्वीराज कुमार, रिंकू कुमार गुप्ता, फिरोज आलम, अंजर अंसारी, सुरेंद्र राम, विक्की करमाली, सोनू कुमार, पिंटू कुमार महेंद्र कुमार, दिगंबर महतो, मुख्तार अंसारी आदि थे।
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