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Saturday, December 19, 2020

ग्रामीणों ने कहा-हम राहत केंद्र में रहेंगे ही नहीं

लखनपुर ब्लाॅक के मैनपाट के तराई इलाके के लोटा ढोंढ़ी पहाड़ से हाथियों के उत्पाद के बाद पहाड़ से नीचे बस्ती में शिफ्ट किए गए ग्रामीण यहां रहने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीण गांव लौटने के लिए अड़े हैं।
ग्रामीणों को जहां शिफ्ट किया है, वहां रहने-खाने की सारी व्यवस्था की हैं। ग्रामीणों के जिद के आगे वन विभाग की 5 सदस्यीय टीम को वहां निगरानी में लगाया गया है, ताकि ग्रामीण वापस न लौट सकें, क्योंकि हाथी अभी भी उसी इलाके में हैं। गौतमी दल के नौ हाथियों ने यहां 7 घरों को तोड़ दिया है। पहाड़ी कोरवाओं को इसके बाद वहां सुरक्षित जगह पर शिफ्ट किया गया है।

पक्के मकान मिल जाएं तो रहने को हैं तैयार
ग्रामीण खेती और घर के कारण दूसरी जगह रहने को तैयार नहीं है। पीएम आवास योजना से अगर ग्रामीणों को नीचे घर बनाकर दिया तो ग्रामीण यहां रहने को तैयार हैं। पहाड़ पर जो ग्रामीण बसे हुए हैं, उनका मकान कच्चे है, जो हमेशा हाथियों से असुरक्षित है। कई बार हाथी यहां मकान तोड़ चुके हैं। हाथी एक बार जहां आ गए, वहां बार-बार आते हैं, हाथियों का यह व्यवहार है। यह इलाका हाथियों के होम रेंज में शामिल हो जाता है।

लोटा ढाोढ़ी पहाड़ पर तक जाने सड़क तक नहीं: जहां हाथियों ने पहाड़ी कोरवाओं के घरों को तोड़ दिया है, वहां जाने के लिए सड़क तक नहीं है। काफी मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम गांव में पहुंची थी। 17 घरों वाले पहाड़ी कोरवाओं के 30 लोगों को पहाड़ से नीचे लाकर शिफ्ट किया गया है।

हाथियों के लिए यह जगह है सुरक्षित
हाथियों के लिए यह सुरक्षित इलाका है। कापू इलाके से हाथी परपटिया होते हुए यहां आते हैं। मानवीय दखल कम है। वहीं हाथियों के लिए चारा, पानी पर्याप्त है, इसलिए हाथी यहां से नहीं निकल रहे। खेतों में धान की कटाई हो गई है, इसलिए हाथी घरों को नुकसान पहंुचा रहे हैं। जिन घरों को तोड़ा वहां धान के अलावा मक्का व महुआ व नमक खा गए थे। डीएफओ पंकज कमल के निर्देश पर रेंजर के अलावा हाथी समस्या पर काम कर रहे प्रभात दुबे गांव पहुंचे थे।



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Villagers said - we will not stay in the relief center


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