इंद्रावती बचाओ अभियान के पर्यावरण प्रेमी सदस्यों का जत्था बुधवार की सुबह 7 बजे तामड़ाघूमर जलप्रपात तक पहुंचा। यहां प्रपात के आसपास बिखरी हजारों खाली प्लास्टिक की थैली, चिप्स के पैकेट, डिस्पोजेबल ग्लास और कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलों को जमा किया। इसके बाद नगर निगम के कचरा संग्रहण केंद्र तक लाकर डिस्पोज किया।
इस पूरी कवायद के दौरान जो सबसे अफसोसजनक पहलू देखने को मिला विश्व प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात से लेकर जगदलपुर के धरमपुरा तक एक भी डस्टबीन नहीं रखा गया है। ऐसे में पर्यटक चाहकर भी कचरे का निपटान उचित तरीके से नहीं कर पाते। पर्यावरण प्रेमियों का जत्था इस बात को लेकर भी चिंतित हुआ कि लॉकडाउन के दौरान जब सभी पर्यटन केंद्रों तक लोगों की आमद नहीं हो पा रही है, ऐसे में सीमित समय में हजारों की संख्या में खाली पैकेट और बोतलों का मिलना इस बात का द्योतक है कि यहां हजारों टन प्लास्टिक कचरा साल भर में डंप हो रहा है, जो निश्चित तौर पर पर्यावरण और आसपास के हरे-भरे जंगलों के लिए घातक साबित होगा। श्रमदान करने वाले सदस्यों में किशोर पारेख, संपत झा, सुनील पांडे, डाॅ. सतीश, डाॅ. प्रदीप पांडे, राजकुमार दंडवानी, वीरेंद्र महापात्र, उमाशंकर झा सहित एक दर्जन से अधिक लोग शामिल थे।
चित्रकोट के पास भी पॉलिथीन का ढेर
कुछ ऐसा ही नजारा चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात के पास भी है। जलप्रपात के साथ यह कचरा न केवल नीचे पहुंचता है, बल्कि बेशकीमती प्राकृतिक जंगलों को नष्ट करता है। ऐसे सार्वजनिक महत्व के स्थलों पर तत्काल पॉलिथीन युक्त पैकिंग वाली खाद्य सामग्री की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाए।
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