झारखंड के 13 नए एकलव्य आवासीय स्कूलों का संचालन कौन करेगा? इनमें कौन पढ़ाएगा? ये सारे स्कूल पीपीपी मोड पर चलेंगे या राज्य सरकार खुद इसकी व्यवस्था अपने हाथ में लेगी, ये सारे प्रश्न अभी अनुत्तरित हैं। इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। विभाग का कोई अधिकारी इस बारे में कुछ बोलने को तैयार नहीं है। यह स्थिति तब है, जब इन स्कूलों में नामांकन का रिजल्ट जुलाई में ही निकाला जा चुका है। अब नामांकन परीक्षा में सफल हुए बच्चों के अभिभावक सचिवालय के चक्कर काट रहे हैं, पर उन्हें कोई सही उत्तर नहीं मिल पा रहा है।
चतरा के कान्हाचट्टी से चयनित एक बच्चे का अभिभावक कल्याण विभाग खोजते- खोजते जब प्रोजेक्ट बिल्डिंग पहुंचा, तो उसे सिर्फ यह बताया गया कि निर्णय होने पर सूचित कर दिया जाएगा। ये 13 एकलव्य स्कूल पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा, पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा, सरायकेला-खरसावां के नीमडीह, चतरा के कान्हाचट्टी, दुमका के काठीकुंड, खूंटी के कर्रा, गिरिडीह के पीरटांड़, पलामू के मनातू, सिमडेगा के गरजा, लातेहार के नेगाई, जामताड़ा के फतेहपुर, प. सिंहभूम के कुमारडुंगी और प. सिंहभूम के गुदरी में हैं।
संचालन के लिए तीन विकल्पों पर हो रहा मंथन
विभागीय अधिकारी तीन विकल्पों पर मंथन कर रहे हैं। पहला विकल्प है कि विभाग द्वारा इम्पैनल्ड एनजीओ की मदद से ही इस बार इन स्कूलों का संचालन किया जाए। पीपीपी मोड पर स्कूल का संचालन होगा। शिक्षकों और अन्य चीजों की व्यवस्था करने की जिम्मेवारी उक्त एनजीओ पर होगी। दूसरे विकल्प में कस्तूरबा विद्यालयों की तर्ज पर इन स्कूलों के संचालन का प्रस्ताव बन रहा है। तीसरे विकल्प में घंटी आधारित शिक्षकों को भी रखने की बात हो रही है।
इन 13 नए एकलव्य स्कूलों में अब भी 12 का निर्माण अधूरा
इन 13 एकलव्य आवासीय विद्यालयों में से 12 अब भी अधूरे पड़े हैं। छह साल बाद भी प. सिंहभूम के गुदरी में बन रहा स्कूल भवन महज 16 फीसदी ही बन पाया है। यही हाल जामताड़ा के फतेहपुर और प. सिंहभूम के कुमारडुंगी का है, यहां अब तक 40 से 45 फीसदी ही काम हो पाया है। केवल लिट्टीपाड़ा में ही शत-प्रतिशत काम पूरा हुआ है।
केंद्र सरकार के सौ फीसदी सहयोग से चलते हैं ये स्कूल
केंद्र सरकार के शत प्रतिशत मदद से यह स्कूल चलते हैं। अभी राज्य में सात एकलव्य स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन आवासीय विद्यालयों में सभी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध हैं। नामांकन टेस्ट में 13 एकलव्य विद्यालय समेत कल्याण विभाग के 82 आवासीय विद्यालयों के लिए 4260 बच्चे सफल हुए हैं।
मैट्रिक परीक्षा में रिजल्ट 90% से अधिक हुआ था
मैट्रिक परीक्षा में कल्याण विभाग के स्कूलों का रिजल्ट 90 प्रतिशत से अधिक हुआ है। 21 स्कूलों का परिणाम शत प्रतिशत रहा। विभाग के 54 आवासीय उच्च विद्यालयों के 1660 छात्र-छात्राओं ने मैट्रिक परीक्षा दी थी, इसमें से 1500 से अधिक उत्तीर्ण हुए। 70 प्रतिशत बच्चे फर्स्ट डिवीजन से पास हुए हैं।
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