वर्ष 2037 की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए रांची के जोनल प्लान के ड्राफ्ट में कई गड़बड़ियां हैं। इससे मास्टर प्लान में छूटे रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) के 170 गांव जाेनल प्लान से भी गायब हाे गए हैं। ऑर्किटेक्ट सुजीत भगत ने बताया कि मास्टर प्लान में इन गांवाें काे शामिल नहीं किया गया, इस वजह से आरआरडीए इन क्षेत्राें में घराें का नक्शा पास नहीं करता है। अब जाेनल प्लान में भी इन गांवाें काे छाेड़ दिया गया ताे न मास्टर प्लान में संशोधन हाेगा और न जाेनल प्लान का उद्देश्य पूरा हाेगा। इससे रिंग राेड के आसपास बसने वाली बड़ी आबादी विकास याेजनाओं से वंचित हाे जाएगी। ये गांव क्यों छूटे, इसका जवाब निगम के अधिकारियों के पास नहीं है।
दूसरी ओर, अगले 17 वर्षाें में रांची शहरी क्षेत्र की आबादी 31 लाख हाेने का अनुमान है। जोनल प्लान के ड्राफ्ट में अाबादी के अनुपात में सड़काें की चौड़ाई नहीं बढ़ाई गई है। 37 साल पुरान यानी 25 वर्षाें की आबादी काे ध्यान में रखते हुए वर्ष 1983 में बने मास्टर प्लान में सड़काें की चौड़ाई जितनी बताई गई थी, जाेनल प्लान में भी उतनी ही चाैड़ी बताई गई है। हकीकत में सड़क की चौड़ाई 37 वर्ष पहले प्रस्तावित चौड़ाई से भी कम है।
बड़ा सवाल... 17 सालों में आबादी के साथ सड़कों पर वाहनों का लोड भी बढ़ेगा, जब सड़कों की चौड़ाई नहीं बढ़ेगी तो ट्रैफिक कंट्रोल कैसे होगा?
गांव शामिल नहीं हुए ताे विकास पर ये पड़ेगा असर
- 170 गांवों में अवैध तरीके से घर बनेंगे। नक्शा पास नहीं हाेने पर घर बनाने के लिए बैंक से लाेन नहीं मिलेगा
- सीवरेज-ड्रेनेज, सड़क, तालाब, पार्क नहीं होंगे, क्योंकि मास्टर प्लान या जाेनल प्लान में इसका काेई जिक्र नहीं है
क्यों हुई लापरवाही
नगर निगम में स्थाई टाउन प्लानर नहीं है। कांट्रेक्ट या दूसरे विभाग के इंजीनियर काे टाउन प्लानर बनाकर भेजा जाता है। वे नक्शा पास करने में व्यस्त रहे। मास्टर प्लान या जाेनल प्लान काे टाउन प्लानर से लेकर नगर आयुक्त तक ने कभी गंभीरता से नहीं लिया।
सीधी बात नगर विकास सचिव से
- रांची जाेनल डेवलपमेंट प्लान पर पूर्व में 42 आपत्तियां आई थीं। ड्राफ्ट काे बिना संशोधन क्याें जारी किया गया?
- - लाॅकडाउन की वजह से सभी लाेगाें काे आपत्ति-सुझाव देने का माैका नहीं मिला था। इसलिए दोबारा ड्राफ्ट जारी किया। सभी आपत्तियों और सुझाव काे एक साथ दूर करने के बाद फाइनल ड्राफ्ट तैयार हाेगा।
- जाेनल प्लान में काफी गड़बड़ी है। मास्टर प्लान के प्रस्तावों काे ही इसमें काॅपी किया गया। इसके बावजूद पुराने ड्राफ्ट पर आपत्ति क्याे मांगी गई।
- - मास्टर प्लान का ही छाेटा हिस्सा जाेनल प्लान हाेता है। इसलिए अधिकतर प्रस्ताव एक जैसे ही रहेंगे। जाे एरिया छूट गए हैं या जहां गड़बड़ी है उसे स्टेक होल्डर्स के सुझाव के बाद दूर किया जाएगा। यह प्रोसेस का हिस्सा हाेता है ताकि सभी आपत्ति-सुझाव पर विचार करने के बाद ड्राफ्ट स्वीकृत हाे।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/35SrteO






No comments:
Post a Comment