राज्य गठन के बाद जिस तरह राजधानी में आबादी बढ़ी और खाली जमीन पर भवन खड़े हुए, उसी तरह की स्थिति शहर के आसपास के क्षेत्रों में बन रही है। शहर से सटे रिंग रोड और ब्रांच रोड में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहा है। रांची नगर निगम क्षेत्र के बाहर का पूरा क्षेत्र रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) के अन्तर्गत आता है। लेकिन, आरआरडीए की ओर से आज तक अवैध निर्माण को रोकने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्राधिकार के पदाधिकारियों की मिलीभगत से ही शहर से सटे क्षेत्रों में बसावट बढ़ती जा रही है। इसकी न तो कोई प्लानिंग है और न ही कोई रोकने टोकने वाला। इस वजह से प्राधिकार क्षेत्र में निजी घर से लेकर बहुमंजिली भवन और गोदाम भी बिना नक्शा पास कराए ही बन रहा है। इस तरह बसावट होते रही तो आने वाले एक दशक में रिंग रोड सहित ब्रांच रोड में राजधानी जैसी समस्या उत्पन्न हो जाएगी।
जमीन बेचने में बिल्डिंग बायलॉज क्यों जरूरी...
जमीन बेचने से पहले उसका ले आउट बनाकर आरआरडीए से स्वीकृत कराना है, ताकि खरीदार को 22 फीट चौड़ी सड़के, सीवरेज-ड्रेनेज और ओपन स्पेस का फायदा मिल सके।
डेवलपर क्यों पास नहीं करा रहे ले आउट...
कई डेवलपर ने बताया कि वे ले आउट प्लान पास कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन प्राधिकार के पदाधिकारियों की नाजायज मांग इतनी अधिक है कि वे पास नहीं कराते।
आरआरडीए ने मात्र 21 डेवलपर को नोटिस भेजकर की खानापूर्ति
बिल्डिंग बायलॉज के तहत जमीन बेचने से पहले उसका ले आउट प्लान बनाकर आरआरडीए से स्वीकृत कराना जरूरी है, ताकि जमीन खरीदार को कम से कम 22 फीट चौड़ी सड़के, सीवरेज-ड्रेनेज के लिए जगह और ओपन स्पेस का फायदा मिल सके। लेकिन, जमीन के धंधे से जुड़े लोग इस नियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कांके, ओरमांझी, रातू, नामकुम और हटिया क्षेत्र में दर्जनों जमीन दलाल हैं, जो जमीन प्लाॅटिंग करके बेच रहे हैं। लेकिन, आरआरडीए ने मात्र 21 डेलवर को ही जमीन का ले आउट प्लान स्वीकृत कराने के लिए नोटिस भेजा है। जिन डेवलपर को नोटिस भेजा गया, उन्होंने अपने प्रोजेक्ट की 80 फीसदी जमीन बेच दी, तब जाकर आरआरडीए के अधिकारियों की नींद टूटी है।
ग्रीन लैंड पर बने भवन पर कोई कार्रवाई नहीं
रांची के मास्टर प्लान में रिंग रोड के दोनों ओर 30 फीट के क्षेत्र को ग्रीन लैंंड घोषित किया गया है। इसमें किसी भी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता। बावजूद रिंग रोड के दोनों ओर निर्माण हो रहा है। रोड के किनारे होटल, मैरिज हॉल, कोल्ड स्टोरेज, निजी घर बन गए हैं। आरआरडीए के पदाधिकारी यदा-कदा निरीक्षण करने जाते हैं, लेकिन आज तक किसी भी निर्माणकर्ता पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अवैध निर्माण चिन्हित कर होगी कार्रवाई
जमीन की प्लॉटिंग कर बेचने वालों को लेआउट प्लान पास कराना अनिवार्य है। जिन लोगों ने बिना प्लान पास कराए जमीन बेची है, उन्हें नोटिस जारी किया गया। जल्द ही प्राधिकार की टीम विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण कर अवैध निर्माण चिन्हित करेगी। उसके बाद संबंधित लोगों पर कार्रवाई होगी।
-राजकुमार, वीसी, आरआरडीए
अभी नहीं चेते तो स्थिति होगी खराब
शहर के बाहर के क्षेत्रों के विकास की प्लानिंग 5 वर्ष पहले होनी चाहिए थी। आने वाले समय में नए क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम, सीवरेज-ड्रेनेज सहित अन्य समस्याएं होंगी। इसलिए आरआरडीए को सख्ती करने की जरूरत है, ताकि मास्टर प्लान के अनुसार शहर के बाहरी क्षेत्रों का विकास हो सके।
-सुजीत भगत, आर्किटेक्ट
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